अहमदाबाद। गुजरात के राजनीतिक क्षितिज पर एक सशक्त, सौम्य और सर्वप्रिय चेहरा, विजय रूपाणी अब हमारे बीच नहीं रहे। अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के भीषण हादसे ने देश को एक गहरा सदमा दे दिया। इस विमान में सवार कुल 242 यात्रियों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने रूपाणी के निधन की पुष्टि करते हुए शोक जताया।
अहमदाबाद प्लैन क्रैश की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत देश के दिग्गज नेताओं ने जताया शोक, देखिए किसने क्या कहा-
पूर्व मुख्यमंत्री रूपाणी की लंदन यात्रा निजी कारणों से थी। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी अंजलि रूपाणी इन दिनों लंदन में थीं और वे उन्हें वापस लाने के लिए रवाना हुए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सीट नंबर 2D पर बैठे विजय रूपाणी इस हादसे के शिकार हो गए और उनका जीवन हमेशा के लिए एक दर्दनाक मोड़ पर समाप्त हो गया।
अहमदाबाद प्लेन हादसे में उजड़ गया एक हंसता-खेलता परिवार: डॉ. प्रदीप व्यास की ‘आखिरी सेल्फी’ बनी हमेशा की याद, लंदन जाने से पहले मौत ने छीन ली मुस्कान
कौन थे विजय रूपाणी?
2 अगस्त 1956 को म्यांमार के येनगोन शहर में जन्मे विजय रूपाणी का जीवन संघर्ष, सेवा और संगठन की मिसाल रहा। सात भाई-बहनों में सबसे छोटे रूपाणी ने म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता के चलते 1960 में अपने परिवार के साथ भारत में शरण ली। उनका परिवार गुजरात के राजकोट में आकर बस गया। यहीं से उन्होंने सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी से स्नातक और कानून की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए थे।
रूपाणी की राजनीतिक यात्रा 1971 से शुरू होकर गुजरात की राजनीति के शिखर तक पहुँची। 1976 की इमरजेंसी में वे 11 महीने जेल में रहे। 1996-97 में राजकोट के मेयर बने। फिर पार्टी संगठन में सक्रिय होते हुए वे 2016 में गुजरात के 16वें मुख्यमंत्री बने और 2021 तक इस पद पर रहे।
अहमदाबाद प्लेन हादसे में टाटा ग्रुप की मानवीय पहल: मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ की सहायता, घायलों का इलाज और हॉस्टल पुनर्निर्माण का उठाया बीड़ा
विजय रूपाणी एक दूरदर्शी नेता माने जाते थे। राजकोट वेस्ट से विधायक रहते हुए उन्होंने स्थानीय विकास से लेकर राज्यस्तरीय योजनाओं तक में प्रभावशाली भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री रहते हुए उनके कार्यकाल में गुजरात ने औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की।
हादसे ने छीन लिया एक अनुभवशील नेतृत्व
पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह चूड़ासमा ने बताया कि हादसे की खबर सुनते ही वे गांधीनगर स्थित रूपाणी के घर पहुंचे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि विजयभाई अब हमारे बीच नहीं हैं। रूपाणी का शांत व्यवहार, गहरी राजनीतिक समझ और संघटनात्मक पकड़ उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी।
उनके निधन से गुजरात ही नहीं, पूरे देश ने एक विनम्र, अनुभवी और सजग राजनेता को खो दिया है। एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 का यह हादसा केवल एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में अपूरणीय क्षति का प्रतीक बन गया है।




