Khabarwaad National Desk: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) का माहौल जारी है. तीन चरणों के चुनाव हो चुके हैं और अब 13 मई को चौथे चरण का चुनाव होना है. इससे पहले शनिवार को तीसरे चरण में हुए चुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने वोटिंग का आंकड़ा जारी कर दिया है. सामने आया है कि, तीसरे चरण के चुनाव का फाइनल वोटिंग टर्नआउट 65.68% है.
बता दें कि इससे पहले चुनाव होने के बाद भी चुनाव आयोग ने आंकड़ा जारी किया था, जिसमें 64.40 फीसदी वोटिंग होने की बात सामने आई थी, हालांकि शनिवार को जारी हुआ आंकड़ा, चुनाव के दिन जारी हुए आंकड़े से तकरीबन 1 प्रतिशत अधिक है.
चुनाव आयोग ने वोटिंग के ठीक बाद जारी किया था आंकड़ा
चुनाव आयोग ने तीसरे चरण की वोटिंग के ठीक बाद आंकड़ा जारी किया था, जिसमें 64.40 फीसदी वोटिंग की बात सामने आई थी. चुनाव आयोग की कई कोशिशों के बावजूद तीसरे चरण में भी मतदान का आंकड़ा 2019 से कम ही रहा. जिन राज्यों में कम वोटिंग हुई है उनमें बिहार, महाराष्ट्र, यूपी, गुजरात शामिल रहे.
2019 में तीसरे चरण में कितनी फीसदी हुई थी वोटिंग?
बता दें कि 2019 में मतदान का डाटा 67.33 प्रतिशत था. इस तरह से इस बार पिछली बार के मुकाबले मतदान का डाटा तकरीबन 2 फीसदी कम रहा. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र चार ऐसे राज्य रहे जहां मतदान का प्रतिशत कम रहा. बीती सात मई को तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश की 10, बिहार की 5, गुजरात की 25 और महाराष्ट्र की 11 सीटों पर वोटिंग हुई थी. ये चार राज्यों की कुल 51 सीटें हैं जहां मतदान सबसे कम हुआ था. चुनाव आयोग ने ये आंकड़ा ऐसे समय में जारी किया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वोटिंग प्रतिशत जारी के आंकड़े जारी करने में लेट-लतीफी पर सवाल उठाए थे.
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कांग्रेस अध्यक्ष ने देरी पर उठाए थे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने INDIA ब्लॉक के अपने साथी दलों को एक चिट्ठी लिखी थी. इस चिट्ठी में कहा गया था कि ये लोकसभा चुनाव ‘लोकतंत्र और संविधान’ बचाने की लड़ाई है. उन्होंने चुनाव आयोग के चिंताजनक रवैये के बारे में लिखते हुए कहा था कि अंतिम मतदान प्रतिशत के आंकड़े जारी करने में हो रही अत्यधिक देरी और उस डेटा में पाई गई विसंगतियां इन चुनावों की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति पर गंभीर संदेह पैदा कर रही है.
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खड़गे ने कहा था कि यह कोई सामान्य चुनाव नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र और संविधान को बचाए रखने की लड़ाई है. इस संदर्भ में, लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाना और ईसीआई को जवाबदेह बनाना हमारा सामूहिक कर्तव्य है ताकि वह अपने मामलों को जिम्मेदारी से संचालित कर सके.
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इसके साथ ही खड़गे ने यह भी कहा था कि ‘पहले चुनाव आयोग 24 घंटे के अंदर यह बता देता था कि कितना फीसदी मतदान हुआ है, लेकिन इस बार देरी हो रही है, उसकी वजह क्या है? इसे लेकर अभी तक आयोग द्वारा कोई सफाई क्यों नहीं दी गई है. देरी के बाद भी जो डेटा आयोग ने रिलीज किया है उसमें कई अहम जानकारियां नहीं हैं. आयोग को बताना चाहिए कि हर पोलिंग स्टेशन पर कितना प्रतिशत मतदान हुआ.’ उन्होंने सभी सहयोगी दलों से इस तरह की कथित गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की.




