मुंबई। महाराष्ट्र में इन दिनों हिंदी और मराठी भाषा को लेकर छिड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। भोजपुरी फिल्म अभिनेता और भाजपा सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ ‘निरहुआ’ ने इस मुद्दे पर खुलकर बयान देते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं को सीधी चुनौती दे डाली है।
निरहुआ ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “मैं मराठी नहीं बोलता। अगर किसी में दम है तो मुझे महाराष्ट्र से निकालकर दिखाए। देश अनेक भाषाओं और संस्कृतियों से बना है और इन्हीं विविधताओं में एकता इसकी पहचान है। इस तरह की गंदी राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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दरअसल, 20 साल के लंबे समय बाद ठाकरे बंधु उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर आए हैं। इस मेल-मिलाप के बाद मराठी भाषा को लेकर सख्ती की मांग ने फिर जोर पकड़ा है। एमएनएस कार्यकर्ता मराठी को लेकर सक्रिय हो गए हैं और गैर-मराठी भाषी लोगों से जबरदस्ती मराठी में बातचीत की मांग कर रहे हैं।
हाल ही में मीरा रोड के पास स्थित जोधपुर स्वीट्स के मालिक के साथ एमएनएस कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इसलिए मारपीट कर दी क्योंकि वह मराठी में बात नहीं कर रहे थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें एमएनएस कार्यकर्ता दुकानदार से जबरन मराठी में बोलने के लिए कह रहे हैं। इस मामले में सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
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निरहुआ ने क्या कहा?
निरहुआ ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सब घटिया राजनीति है, जो देश को तोड़ने की कोशिश है। देश में भाषाई विविधता को सम्मान देना चाहिए। अगर कोई आदमी पांच भाषाएं सीखना चाहता है तो यह उसका हक है। राजनीति लोगों के कल्याण के लिए होनी चाहिए, न कि उनके शोषण के लिए। मैं किसी भी नेता को खुला चैलेंज देता हूं – मैं मराठी नहीं बोलता, मुझे महाराष्ट्र से निकालकर दिखाओ।”
निशिकांत दुबे भी उतरे मैदान में
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एमएनएस को ललकारते हुए कहा, “हिंदी भाषी लोगों को मुंबई में मारने वालों, अगर हिम्मत है तो उर्दू भाषी लोगों को भी मार कर दिखाओ। अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है।” उन्होंने यह बयान मराठी में भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
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एमएनएस की सफाई
इस पूरे विवाद पर एमएनएस पदाधिकारियों का कहना है कि मीरा रोड की घटना दुकानदार के ‘अहंकारी रवैये’ की वजह से हुई। उनका दावा है कि उस समय वे लोग भाषा नीति पर राज्य सरकार द्वारा प्रस्ताव वापस लिए जाने का जश्न मना रहे थे और दुकान से पानी लेने गए थे।




