ढाका/गोपालगंज। बांग्लादेश के गोपालगंज में बुधवार को अवामी लीग और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों ने पूरे देश को हिला दिया। बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के इस पैतृक शहर में छात्र संगठन एनसीपी द्वारा प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने की मुहिम से पहले उपजे तनाव ने हिंसक रूप ले लिया।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोपालगंज दिनभर वर्चुअल रणक्षेत्र बना रहा। सड़कों पर आगजनी, फायरिंग और पथराव का तांडव चलता रहा। हिंसा में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 9 लोग गोली लगने से घायल हैं, जिनका गोपालगंज जनरल अस्पताल में इलाज जारी है। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि सभी मृतकों को गोली लगी थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की चार अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया है। सड़कों पर टैंक और भारी सुरक्षा बल गश्त कर रहे हैं।
बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने हिंसा को अत्यंत गंभीर मानते हुए गोपालगंज में बुधवार रात 8 बजे से 22 घंटे का कर्फ्यू लागू करने का आदेश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि एनसीपी कार्यकर्ताओं पर हमले के दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
प्रत्यक्षदर्शियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बांस के डंडों, ईंटों और पत्थरों से लैस प्रदर्शनकारियों की पुलिस, सेना और BGB के साथ तीखी झड़पें हुईं। हालात को नियंत्रण में लाने के लिए सुरक्षा बलों ने सख्त रुख अपनाया है और उपद्रवियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।
बांग्लादेश में यह हिंसा आगामी छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में बेहद अहम मानी जा रही है, जिससे देश की राजनीतिक स्थिति और अधिक अस्थिर होने की आशंका जताई जा रही है।




