कोरबा। मंगलवार की दोपहर बेंदरकोना गांव में सब कुछ सामान्य था। लोग अपने काम में लगे थे। तभी अचानक गलियों में अफरा-तफरी मच गई। सामने से एक युवक लहूलुहान हालत में भागता दिखा। गले से खून बह रहा था, हाथ में चाकू।
ग्राम निवासी रामकृष्ण कुर्रे उर्फ रामकिशन ने अचानक अपने ही गले पर वार कर लिया। वार इतना गहरा था कि खून की धार साफ दिख रही थी। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले वह बदहवास हालत में गलियों से दौड़ता हुआ गांव के कुएं तक पहुंच गया।
गांव वालों ने पीछे से आवाज़ लगाई। कुछ लोग उसके पीछे भागे। लेकिन रामकृष्ण एक पल भी नहीं रुका। कुएं के किनारे पहुंचते ही उसने सीधे छलांग लगा दी। बस, वहीं पूरा गांव थम गया।
कुछ सेकंड की खामोशी। फिर शोर। लोग दौड़ते हुए पहुंचे। कुएं के अंदर झांकते ही सांसें अटक गईं। देर का मतलब जानलेवा हो सकता था। बिना इंतजार किए ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाला। रस्सी लाई गई। कुछ युवक नीचे उतरे। जोखिम था, लेकिन समय नहीं था।
आखिरकार उसे कुएं से बाहर निकाल लिया गया। वह बेहोशी की हालत में था, शरीर खून से सना हुआ। उसी दौरान डायल 112 और संजीवनी 108 को सूचना दी गई। 112 की टीम सबसे पहले पहुंची और रास्ते में ही युवक को अपनी गाड़ी में लेकर जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रवाना हुई।
गांव में अब सन्नाटा है। लोग अब भी उसी सवाल में उलझे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि बात यहां तक पहुंच गई?
यह घटना सनसनी जरूर है, लेकिन उससे ज्यादा एक चेतावनी भी। कभी-कभी जो चीख बाहर सुनाई देती है, उसके पीछे लंबे समय से चल रहा एक अंदरूनी संघर्ष होता है। रामकिशन का उपचार जारी है। स्थिति सामान्य होने पर पुलिस उससे पूछताछ करेगी कि, आखिर उसने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया?




