सुमित जालान, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। शिक्षा को भविष्य संवारने का सबसे मजबूत माध्यम माना जाता है, लेकिन जब पढ़ाई जारी रखने की राह ही बंद नजर आने लगे तो उसका असर बच्चों के मन पर कितना गहरा पड़ सकता है, इसका दर्दनाक उदाहरण पेंड्रा विकासखंड में देखने को मिला। नौवीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिलने से निराश एक छात्र ने कीटनाशक पी लिया। गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।
घटना पेंड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत खरड़ी के उरांव मोहल्ला की है। यहां रहने वाले सुनील उरांव ने इस वर्ष आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की थी। परिवार की उम्मीद थी कि वह आगे पढ़ाई कर बेहतर भविष्य बनाएगा, लेकिन कोड़गार स्थित हाई स्कूल में नौवीं कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया उसके लिए परेशानी का कारण बन गई।
बताया जा रहा है कि कुछ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उसका प्रवेश नहीं हो सका। छात्र लगातार दस्तावेज जुटाने और स्कूल में दाखिला पाने के प्रयास में लगा रहा, लेकिन बार-बार निराशा हाथ लगने से वह मानसिक दबाव में आ गया। परिजनों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से वह पढ़ाई छूट जाने की आशंका को लेकर बेहद चिंतित और परेशान था।
कृषि कार्य के लिए रखे गए कीटनाशक का सेवन
इसी तनाव के बीच सुनील ने घर में कृषि कार्य के लिए रखे गए कीटनाशक का सेवन कर लिया। उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिजन तत्काल उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया, जिससे उसकी हालत में सुधार आया। डॉक्टरों के अनुसार छात्र फिलहाल खतरे से बाहर है, लेकिन निगरानी में रखा गया है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की पड़ताल शुरू हो गई है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि छात्र का प्रवेश किस दस्तावेज के अभाव में अटका हुआ था और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हो पाए।
यह घटना सिर्फ एक छात्र की व्यथा नहीं, बल्कि उस मानसिक दबाव की भी कहानी है जिससे आज कई बच्चे गुजर रहे हैं। शिक्षा से जुड़ी छोटी-सी बाधा भी उनके मनोबल पर गहरा असर डाल सकती है। ऐसे समय में परिवार, स्कूल और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल प्रक्रिया पूरी कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों को भावनात्मक सहारा देना भी उतना ही जरूरी होता है।




