Khabarwaad National Desk. ईयरबड्स या ईयरफोन का इस्तेमाल बड़ी संख्या में लोग करते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है कि इनकी वजह से आप घायल हो सकते हैं. ऐसा ही एक मामला राजस्थान के भीलवाड़ा से सामने आया है. यहां एक बच्चा ईयरबड्स ब्लास्ट की वजह से घायल हो गया है. हालांकि, बच्चा किस ब्रांड के ईयरबड्स इस्तेमाल कर रहा था, ये तो साफ नहीं है, लेकिन इस हादसे में बच्चे को गंभीर चोट आई हैं. बच्चे की दो अंगुलियां, सिर और आंख के पास चोट लगी है. बताया जा रहा है कि बच्चा जब गाने सुनकर बड्स को केस में रख रहा था, तो ये हादसा हुआ है. अब सवाल आता है कि क्या एक ईयरबड इतना खतरनाक हो सकता है. ईयरबड्स और ईयरबड्स केस में अलग-अलग बैटरी होती है.
क्या इतने खतरनाक होते हैं?
सामान्य रूप से बड्स में 30 से 50mAh की बैटरी होती है, जबकि केस में 500mAh तक की बैटरी होती है. ये एक स्टैंडर्ड पैरामीटर होता है. हालांकि, बैटरी कैपेसिटी कई बार अलग-अलग होती हैं. इस इंडस्ट्री में लोकल प्रोडक्ट्स का बोल बाला है, जिसमें कैसी बैटरी इस्तेमाल होती है, उसकी जानकारी नहीं होती है.
क्यों होते हैं हादसे?
ऐसे में अगर किसी ने कोई लोकल ईयरबड्स खरीदता है, जो बैटरी में ब्लास्ट होने जैसी दिक्कत हो सकती है. कुछ ईयरबड्स 2000mAh तक की बैटरी के साथ आते हैं. चूंकि इनका डिजाइन बहुत ज्यादा कॉम्पैक्ट होता है. ऐसे में बड़ी बैटरी लगाना खतरनाक हो सकता है. साथ ही बैटरी की चार्जिंग पर भी हादसा निर्भर करता है. फास्ट चार्जिंग के लिए हम इन डिवाइसेस को पावरफुल चार्जर्स से चार्ज कर देते हैं. इससे ईयरबड्स (केस के साथ) में ब्लास्ट की संभावना बढ़ जाती है. बेहतर यही होगा कि आप लोकल प्रोडक्ट्स को ना खरीदें. साथ ही चार्जिंग को लेकर भी सावधान रहें. इन डिवाइसेस को सुपरफास्ट चार्जर से चार्ज ना करें.
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