नवा रायपुर। नक्सल प्रभावित राज्यों के शीर्ष पुलिस अफसर आज नवा रायपुर के मे-फेयर रिसॉर्ट में जुट रहे हैं। बैठक में सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी के महानिदेशक, साथ ही छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा के डीजीपी मौजूद रहेंगे।
एजेंडा साफ है—नक्सल अभियान की समीक्षा और आगे की संयुक्त रणनीति।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त किया जाएगा। यह बैठक उसी लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
बैठक का संभावित एजेंडा
सूत्रों के अनुसार, नवा रायपुर बैठक में निम्न बिंदुओं पर खास चर्चा होगी—
- ड्रोन और सैटेलाइट निगरानी: नक्सलियों की हलचल पकड़ने और छिपे ठिकानों की पहचान के लिए।
- सीमावर्ती राज्यों का संयुक्त अभियान: ताकि नक्सली एक राज्य से भागकर दूसरे में शरण न ले सकें।
- सड़क और संचार सुविधाएं: जंगलों में कनेक्टिविटी बढ़ाकर सुरक्षाबलों की पहुंच आसान करना।
- विकास योजनाओं का तालमेल: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास, रोजगार और शिक्षा पर फोकस।
- स्थानीय खुफिया नेटवर्क मजबूत करना: गांव-गांव से भरोसेमंद सूचना तंत्र खड़ा करना।
क्यों अहम है यह बैठक?
नक्सली गतिविधियां भले कम हुई हों, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना के सीमावर्ती जंगलों में नक्सलियों का असर अब भी गहरा है। 2010 में देश में नक्सल हिंसा की 2,213 घटनाएं हुई थीं। 2023 तक यह घटकर 400 के करीब रह गईं। मौतों का आंकड़ा भी उसी दौरान 1,005 से घटकर 98 हो गया।
यानी तस्वीर साफ है—नक्सलवाद कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन खत्म नहीं। आज नवा रायपुर में हो रही यह बैठक तय करेगी कि आने वाले महीनों में सुरक्षा बल किस तरह अभियान को और तेज करेंगे।
छत्तीसगढ़ पर फोकस: आंकड़ों से झलकती बड़ी तस्वीर
नक्सल आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में छत्तीसगढ़ सबसे अहम है। यहां हाल के महीनों में सुरक्षा बलों ने लगातार सफलताएं दर्ज की हैं।
- दिसंबर 2023 से अब तक:
- 453 नक्सली मारे गए
- 1,616 गिरफ्तार
- 1,666 ने आत्मसमर्पण किया
- जून 2024 से जून 2025 (18 महीने):
- 435 नक्सली ढेर, इनमें 48 महिलाएं भी शामिल
- 1,457 आत्मसमर्पण,
- 1,469 गिरफ्तार
- हालिया मुठभेड़ें:
- बीजापुर (9 फरवरी 2025): 31 नक्सली मारे गए, 2 सुरक्षाकर्मी शहीद।
- अबुजमढ़ (21 मई 2025): 28 नक्सलियों की मौत, जिनमें शीर्ष नेता नंबाला केशव राव भी शामिल।
- नारायणपुर (23 मई 2025): 27 नक्सली मारे गए, जिन पर कुल ₹3.33 करोड़ का इनाम था।
- आत्मसमर्पण की लहर:
- हाल ही में 20 नक्सलियों ने सरेंडर किया, जिनमें एक टॉप महिला कमांडर भी शामिल थी। इन पर कुल इनाम ₹33 लाख था।
- पिछले महीने 23 नक्सलियों ने हथियार डाले, इन पर ₹1.18 करोड़ का इनाम था।
| श्रेणी |
आंकड़ा |
| निष्प्रभावित नक्सली | 425 (18 महीनों में) |
| दिसंबर 2023–अब तक मृत्यु | 453 |
| आत्मसमर्पण | ~1,666 + हालिया 20 + 23 |
| गिरफ्तार | ~1,616 + 1,469 |
| विशिष्ट मुठभेड़ों में मौतें | 31 (बीजापुर), 28 (अबुजमढ़), 27 (नारायणपुर) |
| कुल इनाम राशि (आत्मसमर्पण) | ₹1.18 करोड़ व ₹33 लाख |
फील्ड की आवाज़: जमीन पर क्या बदला?
सुकमा के एक ग्रामीण शिक्षक कहते हैं—
“पहले गांव में अंधेरा होते ही लोग घर से बाहर निकलने से डरते थे। अब सुरक्षाबलों की गश्त बढ़ी है, और कई इलाकों में स्कूल फिर से खुलने लगे हैं।”
नारायणपुर के एक सरपंच बताते हैं—
“सरकार की आत्मसमर्पण नीति असर दिखा रही है। जो लड़के जंगल में बंदूक उठाए थे, वे अब नौकरी और खेती की ओर लौट रहे हैं।”
वहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सली संगठन अब छोटे-छोटे गुटों में बंट चुके हैं। एक पूर्व पुलिस अफसर के मुताबिक—
“सुरक्षाबलों का दबाव इतना बढ़ गया है कि नक्सलियों की बड़ी बैठकें तक सुरक्षित नहीं रह गईं। लेकिन चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुईं—अबूझमाड़ और दंतेवाड़ा जैसे इलाके आज भी नक्सलियों का गढ़ हैं।”




