नई दिल्ली। R&AW Chief IPS Parag Jain: भारत सरकार ने एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) के प्रमुख पराग जैन को देश की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का नया प्रमुख नियुक्त किया है। वह 1989 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं और लंबे समय से कैबिनेट सेक्रेटेरिएट में सेवाएं दे रहे हैं। पराग जैन, मौजूदा रॉ चीफ रवि सिन्हा की जगह लेंगे, जो 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
पराग जैन की नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारत की खुफिया एजेंसियां लगातार सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। खास बात यह है कि पराग जैन ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक से पहले भारतीय वायुसेना को महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी।
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ऑपरेशन सिंदूर में ARC की बड़ी भूमिका
R&AW Chief IPS Parag Jain: ऑपरेशन सिंदूर के तहत एविएशन रिसर्च सेंटर ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के भीतर जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों के सटीक कोऑर्डिनेट्स भारतीय वायुसेना को सौंपे थे। इसके साथ ही ARC ने पाकिस्तान के एयरस्पेस की निगरानी और दुश्मन के एयरक्राफ्ट मूवमेंट पर भी नजर रखी थी।
इन सूचनाओं के आधार पर भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिनमें से अधिकतर को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया। ऑपरेशन सिंदूर को भारत की एक बड़ी सैन्य-सफलता माना जा रहा है, जिसमें रॉ की तकनीकी शाखा ARC की भूमिका बेहद निर्णायक रही।
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1962 से सक्रिय है ARC
R&AW Chief IPS Parag Jain: एविएशन रिसर्च सेंटर की स्थापना 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान की गई थी। वर्तमान में यह रॉ की एक तकनीकी और एविएशन विंग के रूप में काम करता है। ARC के पास अपने हाई-टेक टोही विमान और हेलीकॉप्टर हैं, जिनकी मदद से यह दुश्मन के सैन्य और संवेदनशील ठिकानों की हवाई निगरानी करता है।
रॉ की बढ़ती भूमिका और ISI पर दबाव
हाल के वर्षों में रॉ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की गतिविधियों पर लगाम कसने और उसकी आतंकवाद फैलाने की कोशिशों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही कारण है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में रॉ के इनपुट्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ विशेष बैठकों में गंभीरता से लिया गया।




