पुरी (ओडिशा): ओडिशा के पुरी में विश्वप्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ पारंपरिक ‘पहांडी’ अनुष्ठान के साथ भव्यता से हुआ। यह वार्षिक उत्सव श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है, जिसमें देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेने पुरी पहुंचे हैं।
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रथ यात्रा के दौरान भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को 12वीं शताब्दी के ऐतिहासिक श्रीमंदिर से निकालकर विधिपूर्वक सिंह द्वार पर खड़े उनके रथों—तालध्वज (बलभद्र), दर्पदलन (सुभद्रा) और नंदी घोष (जगन्नाथ)—पर विराजमान किया गया। यहां से तीनों देवताओं को 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा, जिसे देवताओं की मौसी का घर माना जाता है।
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पूजा-अर्चना और मंगल आरती के साथ ही रथ यात्रा की प्रक्रिया शुरू हुई। परंपरागत रूप से भोई राजवंश के मुखिया ने सोने की झाड़ू से रथ पथ को शुद्ध किया, जिसे ‘छेरा पहरा’ कहा जाता है। इसके बाद सबसे पहले भगवान बलभद्र के रथ को श्रद्धालुओं ने खींचा, फिर देवी सुभद्रा का रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचा जाएगा।
इस पवित्र आयोजन के मद्देनजर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। लगभग 10,000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें ओडिशा पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, एनएसजी और अन्य एजेंसियां शामिल हैं। ओडिशा के डीजीपी वाई.बी. खुरानिया ने बताया कि रथ यात्रा की निगरानी के लिए 275 से अधिक एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है।
रथ यात्रा का यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं का अद्भुत प्रतीक भी है, जिसे देखने हर साल करोड़ों श्रद्धालु उत्सुक रहते हैं।




