रायपुर जेल के वारंट अधिकारी ने सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी दी है कि पैरोल पर बाहर गए सात बंदियों में से एक बंदी, शिवकुमार उर्फ मुन्ना, 5 दिसंबर 2002 से लापता हैं। बाकी बंदियों में गणेश देवांगन (23 जुलाई 2008), संजीत उर्फ सुजीत (8 सितंबर 2010), कृष्ण कुमार (31 अगस्त 2013), राजीव कुमार (2 अप्रैल 2020), रूपेंद्र साहू (21 नवंबर 2022) और नरेंद्र श्रीवास (18 जनवरी 2024) शामिल हैं। ये सभी बंदी हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे।
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Raipur News Live: इस पूरे मामले पर हाई कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। पिछले महीने हाई कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद शामिल थे, ने पैरोल पर गए कैदियों की वापसी न होने को गंभीरता से लिया और इस पर त्वरित रिपोर्ट मांगी। न्यायमूर्ति सिन्हा ने डीजीपी जेल से शपथ पत्र के जरिए ताजा रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, डीजी जेल ने बताया कि प्रदेशभर की पांच सेंट्रल जेलों से 83 कैदी पैरोल पर बाहर गए थे, जिनमें से 10 को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि तीन की मृत्यु हो गई। बावजूद इसके, करीब 70 कैदी अब भी लापता हैं।
Raipur News Live: इसके साथ ही, बिलासपुर केंद्रीय जेल से भी 22 बंदी पैरोल पर बाहर गए थे, लेकिन वे भी लौटे नहीं। जेल प्रशासन ने बार-बार उनके परिजनों को सूचित किया, लेकिन जब यह बंदी वापस नहीं लौटे तो जेल प्रबंधन ने संबंधित थानों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। बिलासपुर जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी के अनुसार, न्यायालय के आदेशानुसार, बंदियों को पैरोल की निर्धारित अवधि के बाद वापस लौटना होता है। हालांकि, अधिकांश बंदी लौट आते हैं, लेकिन इन 22 बंदियों की वापसी अब तक नहीं हो सकी।




