नई दिल्ली। अमेरिका में इमिग्रेशन और वीजा नियमों में सख्ती का असर अब साफ दिखने लगा है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिकी प्रशासन ने वीजा प्रक्रियाओं को और अधिक कड़ा कर दिया है। इसका सबसे बड़ा असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ा है, जो अमेरिका में उच्च शिक्षा की चाह लेकर आवेदन कर रहे थे।
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पिछले वर्ष भारत से करीब 3.3 लाख छात्र अमेरिका गए थे, लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा तेजी से गिरने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें 70 से 80 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसकी मुख्य वजह वीजा अपॉइंटमेंट स्लॉट की अनुपलब्धता और बढ़ती रिजेक्शन दर है।
अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद के ओवरसीज कंसल्टेंट संजीव राय ने बताया कि यह स्थिति पिछले कई वर्षों में सबसे खराब है। छात्रों को वीजा अपॉइंटमेंट स्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। छात्र हर दिन अमेरिकी पोर्टल को रिफ्रेश कर रहे हैं, लेकिन अपॉइंटमेंट खुलने का कोई संकेत नहीं है। सामान्यतः इस समय तक छात्र इंटरव्यू पूरा कर विदेश रवाना होने की तैयारी में होते थे।
दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे छात्र
वीजा प्रक्रिया में आ रही रुकावटों को देखते हुए कई छात्र अब अमेरिका के बजाय कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकल्पों की ओर देख रहे हैं। विंडो ओवरसीज एजुकेशन कंसल्टेंसी के अंकित जैन ने बताया कि कई छात्रों ने वीजा स्लॉट तो बुक कर लिया है, लेकिन अब तक उन्हें कोई कन्फर्मेशन नहीं मिला है। इससे छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
छात्रों में बढ़ती चिंता
अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह दौर काफी निराशाजनक साबित हो रहा है। उन्हें न सिर्फ समय पर वीजा अपॉइंटमेंट नहीं मिल रहा, बल्कि अनिश्चितता के कारण उनके शैक्षणिक और वित्तीय फैसले भी प्रभावित हो रहे हैं।
सरकार और वीजा एजेंसियों से छात्रों को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति में सुधार होगा और उन्हें समय पर अपॉइंटमेंट और वीजा क्लीयरेंस मिल सकेगा।




