दुर्ग। जिले के 19 गांवों के लगभग 1650 किसान गुरुवार को 400 केवी ट्रांसमिशन टावर लाइन परियोजना में लंबित मुआवजा भुगतान की मांग को लेकर जिला कलेक्टोरेट पहुंचे और घेराव किया। किसानों का आरोप है कि प्रशासन मुआवजा वितरण में अनियमितता और मनमानी कर रहा है।
किसानों ने बताया कि उनके खेतों से गुजर रही हाईटेंशन लाइन परियोजना का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालय बिना अधिसूचना, ग्रामसभा की सहमति या सर्वे रिपोर्ट के किसानों से जबरन हस्ताक्षर करा रहा है, जो मुआवजा अधिनियम 2013 का उल्लंघन है।
कई बार आंदोलन और आवेदन के बावजूद किसानों को केवल आश्वासन ही मिला है। उनकी मुख्य मांग है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उनके प्रतिनिधिमंडल की सीधी मुलाकात करवाई जाए।
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किसान नेता ने किया आत्मदाह का प्रयास
घेराव के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब किसान नेता ढालेश साहू ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस और अधिकारियों ने समय रहते उन्हें रोक लिया। इस घटना के बाद किसानों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए किसानों के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम अभिषेक अग्रवाल से चर्चा की। एडीएम ने मीडिया को बताया कि अधिकांश किसानों का मुआवजा तैयार है और राजस्व टीम गांव-गांव जाकर चेक वितरित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, उनके चेक तैयार हैं। किसान चाहें तो चेक एडीएम कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं या राजस्व टीम गांव में जाकर उनका वितरण करेगी।
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किसानों की मांग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
किसानों ने टावर बेस का 200 प्रतिशत और राइट ऑफ वे का 30 प्रतिशत मुआवजा देने की मांग की थी। एडीएम ने कहा कि मुआवजा पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन द्वारा तय दर पर ही मिलेगा, जैसा कि परियोजना के प्रारंभिक प्रकाशन में निर्धारित था। उन्होंने किसानों को विस्तृत पत्रक देने का भी आश्वासन दिया, जिसमें बताया जाएगा कि कितनी जमीन प्रभावित हुई और मुआवजा किस आधार पर तय किया गया।




