बिलासपुर। ट्रेन में अलार्म चेन खींचने के आरोप में 15 साल पहले सजा पाए गए टीटीई आस्टिन हाइड को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। साल 2010 में आस्टिन हाइड यशवंतपुर एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे और उन्होंने ट्रेन की अलार्म चेन दो बार खींची थी। रेलवे ने आरोप लगाया कि उन्होंने यह अपने परिवार की महिलाओं और सामान को ट्रेन में चढ़ाने के लिए किया।
रेलवे ने मामले की विभागीय जांच कराई और आरपीएफ के दो जवानों को गवाह बनाया। उनके बयान के आधार पर आस्टिन हाइड को दोषी माना गया। 2012 में उन्हें दो वेतनवृद्धि रोकने, डिमोशन और दो साल के वेतन कटौती की सजा दी गई। आस्टिन हाइड ने इसके खिलाफ विभागीय अपील और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे।
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इसके बाद 2015 में उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया कि ट्रेन में चेन खींचना अपने आप में अपराध नहीं है, जब तक यह स्पष्ट रूप से बिना उचित कारण के न किया गया हो। कोर्ट ने पाया कि विभागीय जांच और CAT के फैसलों में गंभीर त्रुटियां थीं। गवाहों के बयान केवल चेन खींचने तक सीमित थे, यह साबित नहीं किया गया कि आस्टिन हाइड ने इसे अनुचित कारणों से किया।
जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सभी पहले के आदेशों को रद्द करते हुए आस्टिन हाइड को पूर्ण राहत दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल चेन खींचना अपराध नहीं है; यह तभी कदाचार माना जाएगा जब यह साबित हो कि इसे बिना उचित कारण के किया गया।
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इस फैसले के साथ ही 15 साल पुराना विवाद समाप्त हुआ और आस्टिन हाइड को न्याय मिला, जबकि रेलवे की पहले की कार्रवाई खारिज कर दी गई।




