बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बस्तर जिले के CAF के जवान रूपेश कुमार पुरी को दुष्कर्म के संगीन आरोपों से बरी कर दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट, जगदलपुर द्वारा 2022 में सुनाई गई 10 साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा अब रद्द हो गई है।
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला झूठे विवाह वादे पर आधारित दुष्कर्म नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे प्रेम संबंध का है। अदालत ने माना कि पीड़िता बालिग थी और अपनी मर्जी से आरोपी के साथ रही, इसलिए इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।
जानिए पूरा मामला
साल 2020 में पीड़िता ने रूपेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि पीड़िता की शादी 28 जून को तय थी, लेकिन 27 जून को रूपेश ने उसे अपने घर ले जाकर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी ने उसे दो महीने तक अपने घर में रखा और बाद में धमकाकर छोड़ दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट, जगदलपुर ने आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ रूपेश ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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रूपेश के पक्ष का दावा
रूपेश के वकील ने तर्क दिया कि दोनों 2013 से प्रेम संबंध में थे। पहले भी पीड़िता ने आरोपी पर छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराया था, जिसमें वह बरी हो चुका था। वकील ने कहा कि पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के घर गई थी और यह मामला प्रेम संबंध का था, न कि दुष्कर्म का।
साक्ष्यों और गवाहों की पड़ताल
हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने खुद फेसबुक पर आरोपी को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। दोनों के बीच लंबे समय तक लगातार बातचीत होती रही। पीड़िता ने स्वीकार किया कि अगर आरोपी के माता-पिता उसे परेशान न करते, तो वह FIR दर्ज नहीं कराती। मेडिकल और FSL रिपोर्ट में भी दुष्कर्म के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।
हाईकोर्ट का फैसला
न्यायालय ने कहा कि यह मामला जबरन यौन शोषण का नहीं, बल्कि आपसी सहमति और प्रेम संबंध का है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि सिर्फ शादी के वादे पर बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।




