रायपुर। छत्तीसगढ़ में 76 हजार से अधिक दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए मात्र 240 बीआरपी समावेशी समन्वयक और विशेष शिक्षक वर्षों से कार्यरत हैं। राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर के अंतर्गत ये शिक्षक विगत 14 से 18 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। वर्तमान में शासन ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 848 नवीन नियमित विशेष शिक्षक पदों की स्वीकृति दे दी है, जिनका राजपत्र में प्रकाशन भी हो चुका है। स्पेशल एजुकेटर संघ के प्रदेश अध्यक्ष सौम्य देवांगन के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि पूर्व से कार्यरत इन 240 शिक्षकों को नवीन पदों में संविलियन किया जाए। इनमें से 107 शिक्षक 50 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं, जिनके लिए पुनः चयन की प्रक्रिया संभव नहीं है। संघ का कहना है कि स्क्रीनिंग कमेटी बनाकर, योग्यता के अनुसार इनका समायोजन किया जाए।
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संघ के पदाधिकारियों ने 26 जून को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भेंट कर अपनी मांग रखी, जिस पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह उम्मीद की जा रही है कि 15 जुलाई को राज्य शासन द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट में विशेष शिक्षकों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ की सीमावर्ती राज्यों जैसे महाराष्ट्र, उड़ीसा और झारखंड में भी विशेष शिक्षकों के लिए बेहतर नीतियां लागू की गई हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ में भी दिव्यांग बच्चों के हित में कार्य कर रहे शिक्षकों के संविलियन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। शिक्षकों और दिव्यांग बच्चों के हित में यह कदम एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल साबित हो सकती है।




