नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए सत्र का स्वागत नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नई दिशा देने वाले अवसर के रूप में किया। उन्होंने इस सत्र को नीति निर्माण, जनकल्याण और राष्ट्रीय विकास के महत्वपूर्ण पड़ाव की संज्ञा दी और सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर देशहित में कार्य करने की अपील की।
मॉनसून: नवसृजन और समृद्धि का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने मॉनसून को नवीनता और नवसर्जन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “यह समय है जब देश नई ऊर्जा और प्रेरणा से भरकर आगे बढ़े। अच्छी बारिश कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।” उन्होंने जानकारी दी कि पिछले 10 वर्षों में जल भंडारण क्षमता में तीन गुना वृद्धि हुई है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलेगी।
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अंतरिक्ष में तिरंगे की उड़ान: विज्ञान में भारत की छलांग
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में भारत के राष्ट्रीय ध्वज को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर फहराए जाने की ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा, “यह हर भारतीय के लिए गौरव का क्षण है। यह सिद्ध करता है कि भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेज़ी से अग्रसर है और वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवा रहा है।”
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता: सैन्य ताकत का प्रदर्शन
पीएम मोदी ने भारतीय सेना द्वारा हाल में चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना करते हुए बताया कि सेना ने आतंकियों के गढ़ में घुसकर मात्र 22 मिनट में उन्हें खत्म कर दिया। उन्होंने कहा, हमने 100% लक्ष्य प्राप्त किया है। मेड इन इंडिया सैन्य शक्ति ने आज दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।
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नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार: लाल गलियारा बना ‘ग्रीन ग्रोथ जोन’
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के कई जिले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से मुक्त हो चुके हैं। आज संविधान की जीत हो रही है, बम और बंदूक की नहीं। सुरक्षा बलों के आत्मविश्वास और समर्पण ने ‘रेड कॉरिडोर’ को ‘ग्रीन ग्रोथ ज़ोन’ में बदल दिया है।
आर्थिक प्रगति और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, और अब वह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेज़ी से अग्रसर है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं और महंगाई दर में भी कमी आई है।
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सत्र को बताया ‘भारत गौरव गान’ का अवसर
प्रधानमंत्री ने इस सत्र को भारत की सफलताओं का उत्सव बताते हुए कहा, “यह सत्र भारत के गौरव गान का सामूहिक मंच होना चाहिए, जहां हर सांसद और हर दल देश की उपलब्धियों की सराहना करे। इससे जनता में आत्मविश्वास बढ़ेगा और विश्व में भारत की सकारात्मक छवि और मजबूत होगी।
लोकतंत्र और राजनीतिक एकता पर बल
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, विश्व अब भारत की बात को गंभीरता से सुनने लगा है। यह हमारी राजनीतिक एकता और लोकतंत्र की ताकत का प्रमाण है। उन्होंने सांसदों और सभी दलों को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि लोकतंत्र की सफलता में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता का आह्वान
प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को और तेज़ करने की अपील की। उन्होंने कहा, हम सब मिलकर सेना की ताकत को बढ़ाएं और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयासों को समर्थन दें।
राजनीतिक मतभेदों के बीच राष्ट्रहित में एकता जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि भले ही वैचारिक मतभेद हों, लेकिन राष्ट्रहित में एकजुटता ज़रूरी है। दल हित में मत भले न मिले, लेकिन देशहित में मन जरूर मिले।
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विधेयकों पर व्यापक और सकारात्मक बहस की उम्मीद
अंत में प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि सत्र के दौरान प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तृत, तथ्यात्मक और सकारात्मक चर्चा होगी। उन्होंने सभी सांसदों को उत्तम संवाद और सार्थक बहस के लिए शुभकामनाएं दीं।




