दुर्ग। स्कूल की घंटी बजी, बच्चे कॉपी-किताब खोलने बैठे और उधर मास्टर साहब लैपटॉप खोलकर ऑनलाइन हर्बल सेशन में व्यस्त! जी हां, धमधा ब्लॉक के कुछ शिक्षक शिक्षा से ज्यादा सेहत और सेल्स पर ध्यान दे रहे थे। वजन घटाने और सप्लीमेंट्स के ज्ञान में इतने रम गए कि क्लासरूम को ही हर्बल हब बना डाला।
जांच में पता चला कि व्याख्याता लोमन वर्मा, शिक्षक बलदाउ पटेल, मुकेश चतुर्वेदी और सहायक शिक्षक खिलेश्वरी चतुर्वेदी स्कूल टाइम में आफिस मीटिंग, ऑनलाइन सेशन और सोशल मीडिया पर हर्बल प्रोडक्ट्स का प्रचार करते पाए गए। बच्चे सोचते रह गए – “आज गणित का पीरियड है या वजन घटाने की वर्कशॉप?”
जिला शिक्षा अधिकारी अरविन्द कुमार मिश्रा ने इस ‘एजुकेशन से हटके इनोवेशन’ पर सख्ती दिखाते हुए खिलेश्वरी चतुर्वेदी को तत्काल निलंबित कर दिया। बाकी तीन शिक्षकों की फाइल अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए ऊपर भेज दी है।
क्लास से ज्यादा क्लासिक आइडिया
किसी जमाने में स्कूलों में सुबह प्रार्थना होती थी, अब यहां हर्बल प्रोडक्ट्स का प्रमोशन चल रहा था। बोर्ड पर A B C D की जगह लिखे जाते थे – “डिटॉक्स, प्रोटीन शेक और सप्लीमेंट पैक।”
अगर बच्चे यही सब सीखेंगे तो आगे जाकर पूछेंगे – “सर, पाइथागोरस प्रमेय का फायदा क्या है? वजन तो हर्बल शेक से ही घट रहा है!”




