नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का दो दिवसीय सम्मेलन चीन के किंगदाओ में होने जा रहा है. जिसमें हिस्सा लेने के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह किंगदाओ पहुंच चुके हैं. रक्षा मंत्री के साथ-साथ नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार-NSA) अजीत डोभाल भी SCO सम्मेलन में भाग ले रहे हैं. जहां पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भी मौजूद हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये पहली बार होगा, जब भारत-पाकिस्तान के रक्षा मंत्री एक मंच पर होंगे. हालांकि, एससीओ समिट में राजनाथ सिंह पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता नहीं करेंगे, क्योंकि पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान के साथ अपनी सभी तरह की डिप्लोमेटिक बातचीत बंद कर दी है.
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चीन में आयोजित इस सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है. इस दौरान राजनाथ सिंह पाकिस्तान समर्थित सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के कूटनीतिक प्रयासों के तहत SCO से आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए और अधिक सहयोग की अपील करेंगे.
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रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, राजनाथ सिंह SCO के सिद्धांतों और उद्देश्यों के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करेंगे. वे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे और क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद को खत्म करने के लिए संयुक्त और निरंतर प्रयासों का आह्वान करेंगे. इसके अलावा, वे SCO के अंदर व्यापार, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी को बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर देंगे.
क्या है SCO
बता दें कि SCO एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना साल 2001 में हुई थी. भारत साल 2017 में इस संगठन का सदस्य बना और साल 2023 में सम्मेलन की रोटेटिंग चेयरमैनशिप भी संभाली थी. मौजूदा वक्त में एससीओ के सदस्य देशों में कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान, बेलारूस और भारत शामिल हैं.




