नई दिल्ली। देश में आवारा कुत्तों और पशुओं से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शीर्ष न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे आवारा कुत्तों की नसबंदी (Sterilization) कर उन्हें शेल्टर होम (आश्रय स्थल) में रखें। कोर्ट ने साफ कहा कि अब सड़कों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्ते नहीं दिखने चाहिए।
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच के समक्ष आया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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सुप्रीम कोर्ट के तीन अहम आदेश
1. एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य एमिकस क्यूरी की सिफारिशों पर अमल करें और तीन हफ्तों के भीतर एफिडेविट (हलफनामा) दाखिल करें। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकारें इस दिशा में अब तक हुई प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें।
2. आवारा पशुओं पर देशव्यापी कार्रवाई
अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के पुराने आदेश को पूरे देश में लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत हाईवे, एक्सप्रेस-वे और सड़कों से सभी आवारा पशुओं को हटाया जाएगा। उन्हें आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जाएगा।
साथ ही, प्रत्येक नगर निगम को पेट्रोलिंग टीम गठित करने और 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने का भी आदेश दिया है, ताकि आवारा पशुओं की जानकारी तुरंत दी जा सके।
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3. संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल, कॉलेज, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर बाड़ लगाने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि इन परिसरों में किसी भी स्थिति में आवारा कुत्तों को रहने नहीं दिया जाए। सभी पकड़े गए कुत्तों का वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन कर उन्हें शेल्टर होम में भेजा जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमुख बातें
- सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने जिलों में सरकारी संस्थानों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक खेल परिसरों की पहचान करें।
- आठ सप्ताह के भीतर इन परिसरों को सुरक्षित बाड़ लगाकर संरक्षित किया जाए ताकि आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जा सके।
- प्रत्येक संस्थान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए जो परिसरों के रखरखाव और निगरानी के लिए जिम्मेदार होगा।
- स्थानीय निकाय (नगरपालिका या निगम) इन परिसरों का नियमित निरीक्षण करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां कोई आवारा पशु या कुत्ता न रहे।
- हटाए गए कुत्तों को फिर उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि स्टरलाइजेशन के बाद स्थायी रूप से शेल्टर होम में रखा जाएगा।
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आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी राज्य सरकारें तीन सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करें, और अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी।सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय जन सुरक्षा, स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था के क्षेत्र में एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ पशुओं की देखभाल और अधिकारों का भी ध्यान रखा जाए, ताकि मानवता और व्यवस्था दोनों के बीच संतुलन बना रहे।




