बिलासपुर। सतगढ़ तंवर समाज में आंतरिक विवाद गहराता जा रहा है। समाज के पदाधिकारियों ने अपने ही समाज के सदस्य और वर्तमान में सरगुजा संभाग में पदस्थ डीएसपी (DSP) डॉ. मेखलेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाज का आरोप है कि डॉ. सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए समाज के अध्यक्ष सहित पदाधिकारियों पर झूठा मामला दर्ज कराया है। वहीं, डॉ. सिंह ने समाज पर अंतरजातीय विवाह के कारण बहिष्कार और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
अंतरजातीय विवाह बना विवाद की जड़
मूलतः ग्राम नुनेरा निवासी डॉ. मेखलेंद्र प्रताप सिंह वर्तमान में सरगुजा संभाग में डीएसपी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने सरगुजा जिले की एक युवती से अंतरजातीय विवाह किया, जिसे लेकर समाज में विरोध शुरू हो गया। इसके बाद सतगढ़ तंवर समाज की एक बैठक कोरबा में आयोजित की गई, जिसमें डॉ. सिंह के विवाह को समाज की नियमावली के विरुद्ध बताया गया।
समाज द्वारा बनाई गई दंड विधान नियमावली के अनुसार, पृष्ठ क्रमांक 5, दंड विधान प्रारूप-1 के सामाजिक अपराध खंड (व), उपखंड 2 में अंतरजातीय विवाह को सामाजिक अपराध माना गया है। बैठक में प्रस्ताव पारित कर डॉ. सिंह को समाज से अलग मानने का निर्णय लिया गया। यह भी तय हुआ कि उन्हें भविष्य में किसी भी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल नहीं किया जाएगा।
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FIR दर्ज, समाज ने किया आरोपों का खंडन
डॉ. सिंह ने इस निर्णय को लेकर कोटा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने समाज के अध्यक्ष और पदाधिकारियों पर गाली-गलौज, धमकी देने और परिवार के बहिष्कार का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
उधर, समाज के पदाधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि न तो किसी को धमकी दी गई और न ही बहिष्कार किया गया है। कोरबा में हुई बैठक एक नियमित सामाजिक आयोजन था, जिसमें नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण और समाज के विकास पर चर्चा की गई। डॉ. सिंह को केवल नोटिस जारी किया गया था, न कि बहिष्कृत किया गया।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
समाज के लोगों ने एफआईआर दर्ज होने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बैठक कोरबा में हुई थी, लेकिन एफआईआर बिलासपुर जिले में दर्ज की गई, वह भी दो माह बाद। समाज के लोगों ने एसपी और आईजी से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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