भोपाल। यह बहुत खुशी की बात है कि मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या में इस तरह की बढ़ोत्तरी हो रही है। गिद्धों का संरक्षण वन्यजीवों के इकोसिस्टम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये मृत जानवरों को खाकर जैविक अपशिष्ट को नष्ट करते हैं, जिससे पर्यावरण स्वच्छ रहता है।
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कटनी जिले के कैमोर क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में हुई इस वृद्धि से यह स्पष्ट है कि वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयास प्रभावी साबित हो रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिकारियों और स्थानीय समुदाय के प्रयासों से ही यह सफलता मिली है। इस तरह के प्रयासों से गिद्धों की प्रजातियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है और उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकता है।
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गिद्धों को प्रकृति का सफाईकर्मी कहा जाता है, क्योंकि वे मृत जानवरों के शवों को खाकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखते हैं. मृत जानवरों के शव खुले में पड़े रहें, तो वे बीमारियों को फैलाने वाले बैक्टीरिया और विषाणुओं का स्रोत बन सकते हैं. गिद्ध इन अवशेषों को खाकर संक्रामक रोगों के फैलाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
गिद्धों की संख्या में कमी का मुख्य कारण डाइक्लोफेनाक दवा का उपयोग था, जिसे पशुओं के इलाज के लिए दिया जाता था. सरकार ने इस दवा पर रोक लगाई है, लेकिन इसका सख्ती से पालन जरूरी है. प्राकृतिक आवासों को संरक्षित करने और गिद्धों के लिए सुरक्षित क्षेत्र बनाने की जरूरत है. यह दवा गिद्धों के लिए जहरीली साबित हुई और इसका सेवन करने वाले गिद्धों की मौत होने लगी. हालांकि, इसमें वनोन्मूलन, शिकार, बिजली के तारों से टकराना, प्रदूषण, आदि जैसे कारण भी शामिल है.
कैमोर क्षेत्र में गिद्धों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी बताती है कि वन विभाग और संरक्षण संगठनों द्वारा किए गए प्रयास सफल हो रहे हैं. यह अभियान लगातार जारी रहा, तो आने वाले समय में गिद्धों की संख्या और भी बढ़ सकती है, जिससे पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी. वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे गिद्धों के संरक्षण में सहयोग करें और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहे.




