बिलासपुर। बिलासपुर स्थित बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट में सुविधाओं के विस्तार को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, आप स्टेटमेंट दे दीजिए कि सरकार कुछ नहीं कर पाएगी, हम पीआईएल खत्म कर देते हैं। कभी तो जागेगा बिलासपुर का भाग्य।
एयरपोर्ट में सुविधाओं के विस्तार की जरूरत
बिलासा देवी एयरपोर्ट को अपग्रेड कर 3C से 4C कैटेगरी में लाया जाना है, ताकि बोइंग और एयरबस जैसे बड़े विमान यहां उतर सकें। इसके लिए रनवे का विस्तार, नाइट लैंडिंग की सुविधा, कन्वेयर बेल्ट और नया टर्मिनल हॉल जैसे जरूरी कार्य प्रस्तावित हैं। वर्तमान में रात के समय विमान उतरने की सुविधा नहीं है, जिससे उड़ानों में बाधा आती है।|
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केंद्र और राज्य सरकार के बीच फंसा मामला
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि रनवे विस्तार के लिए आवश्यक भूमि रक्षा मंत्रालय के अधीन है। वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने रक्षा मंत्रालय को 90 करोड़ रुपये मुआवजा देकर भूमि वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली थी, लेकिन केंद्र सरकार की औपचारिक सहमति अब तक नहीं मिली है।
अब 2025 में राज्य सरकार ने 286 एकड़ भूमि पर रनवे विस्तार की अनुमति दे दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि रक्षा मंत्रालय जमीन के बदले अधिक राशि की मांग कर रहा है। वहीं, राज्य सरकार चाहती है कि पहले जमीन उसके नाम पर हस्तांतरित हो, तभी आगे का काम शुरू किया जाएगा।
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कोर्ट की सख्त टिप्पणी: तस्वीरों में काम कहां हो रहा है?
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में नाइट लैंडिंग कार्य की कुछ तस्वीरें प्रस्तुत की गईं, जिसे देखकर चीफ जस्टिस नाराज हो गए। उन्होंने टिप्पणी की, क्या दिख रहा है इन तस्वीरों में? एक गाड़ी खड़ी है, पीछे दो-चार लोग खड़े हैं। काम कहां हो रहा है? जरा हमें भी दिखाइए।
उन्होंने अधिकारियों की बॉडी लैंग्वेज पर सवाल उठाते हुए कहा, लगता है इन्हें काम करने की कोई इच्छा नहीं है। जब नई सरकार आएगी, तब शायद बिलासपुर का भाग्य जगेगा।
रक्षा मंत्रालय पहले दे चुका है अनुमति, फिर क्यों रुकावट?
याचिकाकर्ताओं के वकीलों, सीनियर एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव और एडवोकेट संदीप दुबे ने कोर्ट को बताया कि रक्षा मंत्रालय पहले ही आवश्यक भूमि पर कार्यों की अनुमति दे चुका है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब अनुमति मिल गई है, तो अब रुकावट क्यों है? राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट प्रफुल्ल एन भारत ने जवाब दिया कि जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी अधूरी है क्योंकि रक्षा मंत्रालय अब अधिक राशि की मांग कर रहा है।
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कोर्ट ने मांगा जवाब, तलब किए मुख्य सचिव और रक्षा सचिव
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और रक्षा सचिव से शपथ-पत्र सहित विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है, तो समन्वय की यह हालत क्यों है?
लंबे समय से लंबित है सुनवाई
बता दें कि बिलासा देवी एयरपोर्ट में सुविधाओं के विस्तार और सीधी महानगर उड़ानों की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दो जनहित याचिकाएं लंबित हैं। एयरपोर्ट चालू हुए चार साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह से नहीं मिल पाई हैं।




