बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में नवजात शिशु के पास पोस्टर लगाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि यह घटना न केवल अमानवीय है, बल्कि नैतिकता और निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन है। रिपोर्ट के अनुसार, नवजात के पास पोस्टर लगाया गया था, जिसमें बच्चे की मां के एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी थी। यह पोस्टर गाइनो वार्ड में भर्ती मां और नर्सरी वार्ड में रखे नवजात के बीच लगाया गया था। पिता ने अपने शिशु को देखने के दौरान यह पोस्टर देखकर भावुक होकर रो दिया।
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सीजे रमेश सिन्हा ने कहा कि यह कृत्य अत्यंत असंवेदनशील और निंदनीय है, जिसने मां-बच्चे की पहचान उजागर कर दी और उन्हें सामाजिक कलंक व भविष्य के भेदभाव का शिकार बना सकता है। हाईकोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे 15 अक्टूबर 2025 तक शपथपत्र दाखिल करें। इसमें स्पष्ट किया जाए कि सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। साथ ही कर्मचारियों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को संवेदनशील बनाने और कानूनी-नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल कानूनी अपराध हैं, बल्कि मानव गरिमा पर सीधे प्रहार हैं। भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए आदेश की कॉपी तुरंत मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।




